लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में नया विधानभवन बनाने की महत्वाकांक्षी परियोजना अब तेजी से आगे बढ़ रही है। गोमतीनगर स्थित सहारा शहर की 245 एकड़ भूमि पर प्रस्तावित इस अत्याधुनिक परिसर के निर्माण के लिए कई कंपनियां दौड़ में शामिल हो गई हैं। सोमवार को कुछ नई कंपनियों ने लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) में अपने डिजाइन और मास्टर प्लान का प्रस्तुतीकरण दिया। इससे पहले भी कई एजेंसियां अपनी रूपरेखा पेश कर चुकी हैं।
परियोजना के तहत नया विधानभवन, अत्याधुनिक सचिवालय, मुख्यमंत्री आवास, विधायक हॉस्टल और वीवीआईपी प्रशासनिक ब्लॉक विकसित किए जाएंगे। सभी कंपनियों ने आधुनिक सुविधाओं और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए अपने-अपने प्रस्ताव प्रस्तुत किए हैं।
पूरी तरह पेपरलेस और डिजिटल होगा नया परिसर
प्रस्तावित विधानभवन को पूरी तरह पेपरलेस और डिजिटल प्रणाली पर आधारित बनाया जाएगा। इसकी डिजाइन अगले 100 वर्षों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर तैयार की जाएगी। परिसर में आधुनिक तकनीक, स्मार्ट प्रशासनिक व्यवस्था और उन्नत डिजिटल सुविधाओं को शामिल करने की योजना है।
जाम से राहत के लिए बनेगी अंडरग्राउंड टनल
योजना में यातायात प्रबंधन और सुरक्षा को विशेष प्राथमिकता दी गई है। वीवीआईपी आवागमन के दौरान गोमतीनगर क्षेत्र में जाम की समस्या से बचने के लिए अंडरग्राउंड टनल और विशेष प्रवेश-निकास द्वार विकसित करने का प्रस्ताव रखा गया है। इसके साथ ही पूरे परिसर के लिए अत्याधुनिक सुरक्षा व्यवस्था भी तैयार की जाएगी।
आधुनिकता के साथ दिखेगी उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान
नए परिसर की डिजाइन में आधुनिक बुनियादी ढांचे के साथ उत्तर प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत की झलक भी शामिल की जाएगी। उद्देश्य ऐसा विधानभवन तैयार करना है जो तकनीकी रूप से आधुनिक होने के साथ राज्य की पहचान को भी प्रदर्शित करे।
शासन करेगा अंतिम कंपनी का चयन
एलडीए के उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार के अनुसार, परियोजना के लिए अंतिम कंपनी का चयन शासन स्तर पर गठित उच्च स्तरीय समिति करेगी। एलडीए सभी प्रस्तुतियों की रिपोर्ट शासन को भेजेगा, जिसके आधार पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
बजट में 100 करोड़ रुपये का प्रारंभिक प्रावधान
उत्तर प्रदेश सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट में इस परियोजना के लिए 100 करोड़ रुपये का प्रारंभिक प्रावधान किया है। यह राशि परियोजना की शुरुआती तैयारियों और आगे की प्रक्रिया को गति देने के लिए निर्धारित की गई है।
48 कंपनियों ने पेश किए मास्टर प्लान, 2027 से पहले निर्माण तेज करने का लक्ष्य
एलडीए की ओर से टेंडर जारी होने के बाद देशभर की लगभग 48 कंसल्टेंट कंपनियां अपने मास्टर प्लान और डिजाइन प्रस्तुत कर चुकी हैं। शॉर्टलिस्ट कंपनियों की रिपोर्ट उच्च स्तरीय समिति को भेजी जाएगी। इसके बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के समक्ष अंतिम प्रस्तुतीकरण होगा। मंजूरी मिलने के बाद विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार की जाएगी और निर्माण कार्य की समय-सीमा तय होगी। सरकार का लक्ष्य वर्ष 2027 से पहले इस भव्य परिसर के निर्माण कार्य को गति देना है, ताकि भविष्य में विधानसभा के आगामी सत्र नए भवन में आयोजित किए जा सकें।
